जिस तरह आस में लाखो तारे है ओंर हर एक तारा अपनी प्रकाश बिखेर रहा है उसी प्रकार मैं इस दुनिया में प्रकाश बिखेरने की कोसिस कर रहा हु.पता नहीं मैं दुनिया की किस छोर में खड़ा हु.कहा पे दुनिया का अंत है ,कुछ समझ में नहीं आ रहा है,यहाँ हर कोई अपने - अपने लाइफ में व्यस्त है,किसी को किसी की भी ख़बर नहीं है,घर से तो निकल पड़ा था केरल के मदमस्त हरे -भरे नजारों को देखने के लिये ओंर दिखा भी क्या ,दुनिया का वो नज़ारा जो शायद किसी ओंर जगह नहीं मिला होगा,चारो तरफ़ हरियाली ,पानी के नम्र छींटे जैसे ठण्ड के मौसम में आसमान धरती पर ओंस की बुँदे बिखेर रहा हो.मन में पुरा जोश भरा हुआ था.केरल का सुहावना मौसम देख कर मन बहुत खुश हुआ जा रहा था.आख़िर वो दिन आ ही गया था जिस दिन मेरा यहाँ एड्मीसन हुआ था.मैं बहुत खुश था मुझे यकीन नहीं हो रहा था की बहुत बड़े कॉलेज में मेरा एड्मीसन हो गया था।
अपनी लाइफ में मैंने पहली बार इतना बड़ा कॉलेज देखा था । दोस्त तो बहुत थे लाइफ में बुत जो यहाँ मिले उनकी तो बात ही कुछ ओंर है.सब के सब एक नम्बर के छंटे हुए पढने वाले।पलहे दिन सबसे जोरदार मुलाकात हुई ,मुलाकात का सिलसिला बहुत देर तक चलता रहा , दिल्ली ,झारखण्ड,उत्तर प्रदेश, बिहार पुरा भारत मेरा दोस्त बना हुआ था.कुछ दिनों में सब इतने घुल मिल गए थे की पता ही नहीं चल पा रहा था की हम सब अपने -अपने घरो से बहुत दूर आ गए है। क्लासेस स्टार्ट हो गई थी,पढने वालो का दिन आ गया था । २ हफ्ता बिता भी नहीं था की एक दिन एक टीचर ने टेस्ट ले लिया। सबके नम्बर कम आए थे हम लोगो को तो मालूम भी नहीं था की उस दिन टेस्ट होने वाला है ,ये है हमारा कॉलेज एन आई टी कालीकट जहा हर समय बस एक्साम ही होते रहते है। पढ़ाई के साथ साथ हॉस्टल में रहने का मज़ा भी बहुत आ रहा था।
मैं तो अपनी लाइफ में फर्स्ट टाइम घर से बहार रहने के लिये निकला था.बहुत अच्छा लग रहा था,ना कोई रोकने वाला है ना कोई कहने वाला है,बस हर कोई अपनी मर्जी का मालिक था। रात के २-३ बजे तक दोस्तों के साथ रूम में गप्पे मरना ,हर कोई जानता है.ये कोई नई बात नहीं है,हर हॉस्टल में ऐसा होता है। ओंर फ़िर सुबर उठकर ८ बजे की क्लास करना.बहुत कष्टदायक होता है। दिन भर क्लास अटेंड करना ,मौज मस्ती करना ,बहुत अच्छा लगता था. कभी कभी दोस्तों के साथ कही ट्रिप में जाना तो कभी किसी के जन्म दिन के पार्टी ,धीरे -धीरे सब खत्म होता चला गया ओंर समय भी बदलता चला गया । लोग भी बदलते चले गए । दोस्तों की जॉब लगी ओंर वो लोग भी चले गए।
अब तो बस वही पुराने दिनों की यादे रह गई है। बहुत खुशी महसूस होती है पुराने दिनों को याद करके ,उन दोस्तों को याद करके जिनके साथ ना जाने कितनी हसीन पल बिताये थे मैंने । बस अब वो यांदे शेष रह गई है । रस्ते वही है, राहगीर बदल गए है , दोस्त वही है बस नाम बदल गए है । पता नहीं उस मंजिल को पाने में ओंर कितना देर है , जिसके लिये मैं लाइफ से दिन रात लड़ते जा रहा हु.......
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ye kya shuru kiya hi nahi ki khatm kar diya ??
ReplyDelete2/3rd part me brief explanation aur phir suddenly ye Full stop ........kuch aur likho ......aur haan hindi me english ke words sahi meaning convey nahi karte ....just read once........other than this I must say it was nice to ride through your memory....!!